Friday, 11 November 2016

एक दर्पण समाज को

यह आर्टिकल बहुत ही सेंसेटिव है और जो मै लिख रहा हु वह शायद मेरे उम्र के लोगो के बाहर की बात है |
आज तक जीवन मे जो भी अनुभव मिला और मै ने समाज को कितना समझा या समाज ने मुझे कितना समझा सब लिखुंगा |
पहले समझे समाज बंता कैसे है ? समाज बंता है हमसे आप से और जो भी लोग मेरे आस पास है |
जिस प्रकार ढेर सारे फलों मे से सभी सुंदर नहीं होते कुछ खराब होते है कुछ दागीले उसी दागों की तरह हमारे समाज मे कई बुराइया है |और हाँ मै उस समाज की बात बिलकुल नहीं कर रहा हूँ जिसकी बात ये सियासत के लोग मंचों पर खड़े हो कर करते है | उनके अनुसार सब कुछ सही हो रहा है | लेकिन क्या वास्तव मे ऐसा है ? यह एक बड़ा सवाल है |
आज हम बड़ी बड़ी बातें करेगे जैसे महिला शश्क्तिकरण , स्त्री शिक्षा लेकिन बातें करना महत्वपूर्ण  नहीं है | बलकी यह मत्वपूर्ण है की क्या अब तक कोई बदलाव आया ?
और हाँ हम सामान्य अधिकार की बात कैसे भूल सकते हैं | इस विषय पर बात करने के पहले यह जान लेना जरूरी है की महिलाओ के लिए संसद मे कितनी सीटे आरक्षित हैं | कुल ३३ % सीटें आरक्षित है महिलाओं के लए पर १२.५% ही भरी है | तो ये कैसा समाज है जो बाहर तो समानता की बाते करता है लेकिन संसद मे ही महिलाओ के संग भेद भाव हो रहा है |
जनाब # वास्तविकता तो यह है की आज तक हम अपनी बहनो मे बेटियों में आत्म विश्वास उत्पन्न कर ही नहीं पाए | यह किसी और की गलती नहीं है यह स्वयं हमारी ही गलती है|
हमने ही इन्हे कहा है  'ऐसे करो' 'वैसे करो' 'ऐसे कपड़े मत पहनो' पर क्या किसी लड़के को कहा गया 'अपनी नज़र मे गंदगी मत लाओ' नहीं |
तो इसके हम खुद जीमेदार हैं |
पर अभी भी आस की एक किरण बाकी है | देश की ८०%  आबादी जो की युवा है  अगर उसे सही नीव मिली तो सब कुछ संभव है | युवाओ को सही साँचे मे ढालने का काम माँ बाप का है | तो अब बच्चों से जुड़ने की जरूरत है , समझने की जरूरत है , हर चीज़ को उनके नज़रीय से देखने की जरूरत है |
और युवा अगर मजबूत हो गए तो हमारा देश सच मुछ अतुल्य भारत हो जाएगा |

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