Friday, 18 November 2016

एक दर्पण सोशल मीडिया को



आज का ब्लॉग बहुत जादा छीजे कवर करता है इसका विस्तार बहुत बड़ा है | आज हम बात करने जा रहे है सोशल मीडिया की जी हाँ आप के प्रिय फेस्बूक , वाट्सप , टिवीटर , वाएबर और न जाने क्या क्या |
आज मैं इस आर्टिक्ल के माध्यम से सोशल मीडिया को एक दर्पण दिखने की कोशिस करूंगा |
आप काही पर भी जाए हम सभी सोश्ल मीडिया से प्रभावित रहते है , आज हर काम सोशल मीडिया के जरीय हो रह है | पर एसके कई दुष्प्रभाव भी हैं , कई लोग धर्म के नाम से झूठी अफवाए फैला रहें हैं , तो कई राजनीति के नाम से और कई सोनम गुप्ता के नाम से |
आप सोचेगे ये सोनम गुप्ता कौन है इसकी कहानी क्या है ?
तो जान लिजीय एक व्यक्ति जिसे उसकी प्रेमिका ने छोड़ दिया था उसने अपनी प्रेमिका का नाम एक 10 के नोट पर लिखा और उसे चला दिया एस तरह वह नोट कई राज्यों से हो के गुजरा एतने मे ही किसी महान सोशल मीडिया पीड़ित ने उस नोट का फोटो फेस्बूक पर दाल दीया | फिर क्या था शुरू हो गया सिलसिला सोनम गुप्ता बेवफा है | यह 2016 के शुरू की  खबर है |
अभी कुछ दिन पहले माननीय म्रधान मंत्री मोदी जी ने जब ५०० और १००० के नोटो  पर बैन लगाया काला धन खत्म करने के लीए तो फिर से ये आशिक सामने आया और ५००, १००० और २००० के नोटो पर लिखा सोनम बेवफा है फिर क्या था नोट बंद होने की खबर तो बड़ी थी ही पर उससे बड़ी यह खबर हो गई की सोनम गुप्ता बेवफा है |
फिर नोट बंदी के बाद एक और अफवाह फैली की नमक का स्टॉक देश मे खत्म हो गाया है | दुकानों से ५०० रुपयों  मे कुछ लोगों ने नमक खरीदा जो कल २० रूपए किलो मिलता था वोह अफवाह के कारण ५०० किलो के भाव मे बिका |
नोटों से जुड़ी एक और अफवाह सोश्ल मीडिया पर इस समय जोरो पर है |
वो है २००० के नए नोट मे gps ट्रैकिंग नैनो चिप है | और जो भी काला धन एकत्रित करेगा वह सरकार की नजरो में तुरंत आ जाएगा और पकड़ लीया जाएगा | इसका फाएडा कई यूतुबर्स ने उठाया
और ड़ाल दिये कई वीडियो जो की पुष्टि करतें है की २००० की नोटों मे चिप है |और मजे की बात ये है की कइयों ने इसपर मीमे {मीमे} भी बना डाला |
फिर कई न्यूज़ चैनल ने इस अफवाह को गलत ठहराया तब जा कर इस खबर पर खर्चा रुकी | हमारा पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान वह भी अफवाहे फैलाने मे आगे है अभी कुछ दिन पहले १० भारतीय सैनिक मारने की अफवाह फैला रहा था | जिसे भारत ने बिलकुल बेबुनियाद बताया |
पर कभी आप ने सोचा है ये अफवाहे कैसे बनती है | इसका जन्म होता है हमारी नासमझी से
हम किसी चीज़ को गलत समझ लेते हैं और फिर उसे सोश्ल मीडिया पर डाल देते है | सोशल मीडिया पर कई ऐसे दिग्गज हैं जो असली खबर को बादल कर उसमे नमक , मिर्च लगा कर पेश करते है |
बस फिर क्या होता हैं फैल जाती है अफवाह |
अफवाहों से बचाने का सबसे सरल और अच्छा उपाय है की जो खबर आप सुने उस खबर को तब तक सही ना माने जब तक किसी विशेस और विश्वसनीय माध्यम से न मिली हो |
क्यू की अफवाहों से जादा कुछ तो होता कुछ नहीं है लेकिन उनसे कभी कभी भरी नुकसान उठाना पड़ता है | कोशिश करें अफवाहों से बचे |
फिर मिलेगे अगले ब्लॉग में तब तक आप का दिन मंगलमय हो |
जय हिन्द

  

Sunday, 13 November 2016

एक दर्पण खुद को


आत्म दर्पण क्या है ? आत्मा दर्पण का सरल भाषा मे अर्थ है स्वयं  को आईन दिखाना है |
लेकिन अगर मैं काहू इसका अर्थ यही तक सीमित है तो यह तो एक मज़ाक की बात लगेगी लेकिन ऐसा नहीं है , आत्मा दर्पण का मतलब बहुत गहराई वाला है जिसे शायद मैं भी अभी अच्छे से नहीं समझ पाया हूँ | अबतक जो कुछ भी जिंदगी ने सिखाया उसे लिखने की कोशिस करता हूँ|
आत्म दर्पण के विषय पर आने से पहले हम ये जाने की खुद को दर्पण दिखाना जरूरी क्यों हैं ?
जिसप्रकार हम किसी दूसरे व्यक्ति को देख उसकी निंदा या प्राशनशा करते हैं और उसे कुछ कहते समय हम अपने बारे मे बिलकुल भूल जाते हैं इस लिए हमे भी दर्पण देखने की आवश्यकता है , ताकि हम खुद को देख कर अपनी निंदा या प्रशंसा खुद कर सके और यदि किसी और को कुछ कहे तो हमे अपनी मर्यादा ध्यान रहे |
यह आर्टिकल पढ़ते समय आप सोचीये आप पर एक कानूनी करवाही हो रही है आप मुलजिम हैं , आप ही वकील हैं ,आप ही गवाह और जाज़ हैं | आप जीवन के हर पहलू पर काही खुद को गलत काही सही पाएगे |
यदि मै पूछूं बचपन से लेकर आज तक आप ने क्या क्या किया ? उत्तर होगा कई अनगिनत कार्य किये |
पर जब मै यह पूछूं की क्या वे सभी सही थे | तो जादा तर लोग चुप्पी ही साधे रहेगे | क्यू की यहा कोई भी ऐसा नहीं है जो 100% सही हो | हम सभी का एक इतिहास है और चाह कर भी हम उससे दूर नहीं भाग सकते | मै स्वयं जो आप को इतने उपदेश दे रहा हूँ कोई भगवान नहीं हूँ , मै ने भी गलतिया की हैं , और शायद आप से जादे की हों या आप ने जितनी की है उनसे भी बड़ी लेकिन मुख्य बात यह नहीं है की आप ने कितनी गलतिया की , मुख्य यह है की आप ने उन गल्तियो को स्वीकार कर के कुछ सीखा या नहीं |
आज हम सभी अपनी अपनी मुसीबतों से लड़ रहें हैं ? किसी को नौकरी की मुश्किल, किसी को छोकरी की , किसी को पढ़ाई की , किसी को घर की , किसी को शादी की और किसी को नेट कनैक्शन की |
अब सब ध्यान से पढ़िएगा मै सभी मुसीबतों का हल बताने जा रहा हूँ |
हमारी जादा तर मुश्किले तो इस लिए उत्पन्न होती है की हम अपने आप को कुछ जादा ही योग्य मान लेते हैं जैसे कोई नौकरी करने गाय तो उसने सोच रखा हो मै २०००० वाली ही नौकरी करुगा लेकिन वह उसके योग्य नही है वह १५००० की नौकरी करने योग्य है तो होगा ये की वह अपनी कमी को नजर अंदाज कर के बस अंधा धुन मेहनत करता जाएगा और उसे कुछ नहीं मिलेगा सिवाय मुसीबतों के | यही बात हर जगह लागू  है हम अपनी काबलियत को वास्तविकता से कई अधिक माप लेते है और खुद ही मुसीबतों , बेचैनी ,और असंतोष को निमंत्रण दे कर कहते है बहुत मुश्किल जिंदगी है |
इन सभी समस्याओं का हल है खुद से सच बोलना जिस दिन आप ने खुद से सच बोला आप की आधी परेशनीय खुद ब खुद कम हो जाएगी |
सभी परेशानियों का हल है आत्मा दर्पण इस लीय हमे दूसरों को नहीं खुद को अपनी ही नजर से देखना है | एक आइना खुद को दिखाना है की हमारी वास्तविकता क्या है यह जानना है |
फिर मूलाकात होगी अगले ब्लॉग मे |

Friday, 11 November 2016

एक दर्पण समाज को

यह आर्टिकल बहुत ही सेंसेटिव है और जो मै लिख रहा हु वह शायद मेरे उम्र के लोगो के बाहर की बात है |
आज तक जीवन मे जो भी अनुभव मिला और मै ने समाज को कितना समझा या समाज ने मुझे कितना समझा सब लिखुंगा |
पहले समझे समाज बंता कैसे है ? समाज बंता है हमसे आप से और जो भी लोग मेरे आस पास है |
जिस प्रकार ढेर सारे फलों मे से सभी सुंदर नहीं होते कुछ खराब होते है कुछ दागीले उसी दागों की तरह हमारे समाज मे कई बुराइया है |और हाँ मै उस समाज की बात बिलकुल नहीं कर रहा हूँ जिसकी बात ये सियासत के लोग मंचों पर खड़े हो कर करते है | उनके अनुसार सब कुछ सही हो रहा है | लेकिन क्या वास्तव मे ऐसा है ? यह एक बड़ा सवाल है |
आज हम बड़ी बड़ी बातें करेगे जैसे महिला शश्क्तिकरण , स्त्री शिक्षा लेकिन बातें करना महत्वपूर्ण  नहीं है | बलकी यह मत्वपूर्ण है की क्या अब तक कोई बदलाव आया ?
और हाँ हम सामान्य अधिकार की बात कैसे भूल सकते हैं | इस विषय पर बात करने के पहले यह जान लेना जरूरी है की महिलाओ के लिए संसद मे कितनी सीटे आरक्षित हैं | कुल ३३ % सीटें आरक्षित है महिलाओं के लए पर १२.५% ही भरी है | तो ये कैसा समाज है जो बाहर तो समानता की बाते करता है लेकिन संसद मे ही महिलाओ के संग भेद भाव हो रहा है |
जनाब # वास्तविकता तो यह है की आज तक हम अपनी बहनो मे बेटियों में आत्म विश्वास उत्पन्न कर ही नहीं पाए | यह किसी और की गलती नहीं है यह स्वयं हमारी ही गलती है|
हमने ही इन्हे कहा है  'ऐसे करो' 'वैसे करो' 'ऐसे कपड़े मत पहनो' पर क्या किसी लड़के को कहा गया 'अपनी नज़र मे गंदगी मत लाओ' नहीं |
तो इसके हम खुद जीमेदार हैं |
पर अभी भी आस की एक किरण बाकी है | देश की ८०%  आबादी जो की युवा है  अगर उसे सही नीव मिली तो सब कुछ संभव है | युवाओ को सही साँचे मे ढालने का काम माँ बाप का है | तो अब बच्चों से जुड़ने की जरूरत है , समझने की जरूरत है , हर चीज़ को उनके नज़रीय से देखने की जरूरत है |
और युवा अगर मजबूत हो गए तो हमारा देश सच मुछ अतुल्य भारत हो जाएगा |